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खेल एवं खेल भावना – जीवन को बेहतर बनाने की असली कला

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 खेल एवं खेल भावना – जीवन को बेहतर बनाने की असली कला खेल केवल समय बिताने का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन को समझने और बेहतर बनाने का एक माध्यम है। जब हम “खेल” की बात करते हैं, तो हमारे मन में क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी या हॉकी जैसे खेलों की तस्वीर आती है। लेकिन “खेल भावना” उससे कहीं अधिक गहरी चीज़ है। यह वह सोच और व्यवहार है जो हमें जीत और हार दोनों को समान भाव से स्वीकार करना सिखाती है। --- खेल क्या है? खेल वह गतिविधि है जिसमें हम शारीरिक या मानसिक रूप से सक्रिय होते हैं। यह हमें आनंद देता है, शरीर को स्वस्थ रखता है और मन को प्रसन्न करता है। खेल अकेले भी खेले जा सकते हैं और टीम के साथ भी। जैसे: बच्चे पार्क में क्रिकेट खेलते हैं गाँव में कबड्डी या कुश्ती होती है स्कूल में स्पोर्ट्स डे आयोजित होता है ये सब खेल के अलग-अलग रूप हैं। --- खेल भावना क्या है? खेल भावना का मतलब है— ईमानदारी से खेलना नियमों का पालन करना विरोधी का सम्मान करना जीतने पर घमंड न करना हारने पर निराश न होना यानी खेल भावना हमें सिखाती है कि असली जीत सिर्फ ट्रॉफी नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनना है। --- इतिहास में खेलों का मह...

विद्यालय में निर्वाचन प्रक्रिया: जिम्मेदार नागरिक और सशक्त राष्ट्र की नींव

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विद्यालय में निर्वाचन प्रक्रिया का महत्व, उसका व्यापक योगदान एवं पाठ्यक्रम में समावेशन के लाभ निर्वाचन प्रक्रिया किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है। यह वह माध्यम है जिसके द्वारा नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं और शासन प्रणाली को दिशा प्रदान करते हैं। सामान्यतः इसे केवल राष्ट्रीय या राज्य स्तर के चुनावों तक सीमित समझा जाता है, परंतु यदि इस प्रक्रिया को विद्यालय स्तर पर लागू किया जाए, तो यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विद्यालय में कक्षा मॉनिटर, हाउस कैप्टन या स्कूल कैप्टन के चुनाव के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतंत्र का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है, जो उनके व्यक्तित्व और सोच को गहराई से प्रभावित करता है। विद्यालय स्तर पर निर्वाचन प्रक्रिया का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और अनुशा सन की भावना विकसित करती है। जब छात्र चुनाव प्रक्रिया में भाग लेते हैं—चाहे वे उम्मीदवार हों या मतदाता—तो वे नियमों का पालन करना, समय का महत्व समझना और सामूहिक निर्णय का सम्मान करना सीखते हैं। उम्मीदवार ...

शिक्षा में एनआईओएस की भूमिका

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सभी छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा चुके हैं । कुछ के परिणाम उनकी उम्मीद के अनुरूप आए हैं तो कुछ के निराशाजनक । परंतु निराश होने की आवश्यकता नहीं है । दिल्ली सरकार के विद्यालयों में कक्षा नौवीं में दो साल लगातार अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों के लिए एक मौक़ा विभाग द्वारा दिया जाता है । विद्यालय में ही रजिस्टर्ड रहते हुए एनआईओएस के साथ मिलकर इन्हें कक्षा दसवीं के फॉर्म भरवाए जातें हैं । विद्यालय में एक नोडल इंचार्ज होता है जिसकी मदद से आप एनआईओएस का फॉर्म भर सकते हैं । फीस में सरकार द्वारा सब्सिडी भी प्रदान की जाती है ।  कई विद्यालयों का एक क्लस्टर बना होता है जो समय समय पर छात्रों को अलग अलग नोटिफिकेशन जारी करता है जैसे कब प्रैक्टिकल हैं , कब एडमिट कार्ड मिलेंगे, एग्जाम सेंटर कहाँ है , मार्कशीट एवं सर्टिफिकेट्स भी संबंधित विद्यालय में पहुँचा दिए जाते है  ।जिस से अभिभावकों एवं छात्रों को काफ़ी आसानी होती है ।  कक्षा दसवीं एनआईओएस से पास करने के बाद कक्षा ११ में वापस उसी विद्यालय में आपको एडमिशन भी दिया जाता है ।  सबसे बड़ा सवाल  क्या NIOS की मान्यता है ? क्य...

भारत का दुनिया में बढ़ता दबदबा

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भारत का दुनिया में बढ़ता दबदबा: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसकी अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति ने दुनिया में इसके दबदबे को बढ़ाया है। *कारण:* 1. *आर्थिक विकास*: भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, जिससे इसकी आर्थिक शक्ति बढ़ रही है। 2. *राजनीतिक स्थिरता*: भारत में राजनीतिक स्थिरता है, जिससे इसकी राजनीतिक शक्ति बढ़ रही है। 3. *सैन्य शक्ति*: भारत की सैन्य शक्ति बढ़ रही है, जिससे इसकी रक्षा क्षमता बढ़ रही है। 4. *विज्ञान और प्रौद्योगिकी*: भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है, जिससे इसकी आर्थिक और राजनीतिक शक्ति बढ़ रही है। 5. *अंतर्राष्ट्रीय संबंध*: भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंध मजबूत हो रहे हैं, जिससे इसकी राजनीतिक और आर्थिक शक्ति बढ़ रही है। *प्रभाव:* 1. *वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान*: भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को बढ़ा रही है। 2. *राजनीतिक प्रभाव*: भारत की बढ़ती राजनीतिक शक्ति इसके राजनीतिक प्रभाव को बढ़ा रही है। 3....

LOST IN DARKSIDE OF ONLINE GAMING

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11 साल के बच्चे के शब्द अत्यधिक गेम खेलने पर !!! {यहाँ एक विशेष व्याख्या है कि गेम बच्चों के दिमाग पर कैसे हावी हो जाते हैं! 😧 -> सबसे पहले जब वे इसे खेलना शुरू करते हैं, तो वे रैंक पुशिंग के बारे में नोटिस करना शुरू करते हैं। -> फिर वे धीरे-धीरे घंटों तक इसे खेलना शुरू कर देते हैं। -> फिर वे पढ़ाई को अनदेखा कर देते हैं और जब कोई पढ़ने के लिए कहता है तो रोने लगते हैं। } Words of a child 11 years old on playing excessive games !!! { Here's a exclusive explanation how games takes over children's minds !😧   -> First when they starts playing it, they starts to notice about rank pushing. -> Then they slowly - slowly starts to play it for hours and hours. -> Then they ignores study and cries when someone ask for studying.} Now lets talk about how to reduce  there screen time.⌚ First make a timetable on the phone usage.  Apply the children's lock on the game that they plays as it'll reduce the screen time.🔒 Then just become a little strict towards your chi...

मेरा सवा शेर भारत

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मेरा सवा शेर भारत   कुछ लोगों का कहना है की इस सरकार ने ये बीच दिया वो बेच दिया । एक साथी ने कहा की इस सरकार ने देश को चवन्नी के भाव बेच दिया है । तो ऐसे सभी चवन्नी छाप लोगों  को मेरा जवाब है कि ये चवन्नी अब एक रुपये में लग कर सवाया हो चुकी है । जिसे विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की जीडीपी की तेज़ी से समझा जा सकता है । दुनिया के बड़े बड़े शेर कहे जाने वाले देशों के आगे सवा शेर भारत खड़ा है । जिसके राष्ट्रीय चिन्ह में भी शेर है ।आज विश्व की सबसे तेज प्रगतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है भारत की अर्थव्यवस्था । विश्व का हर बड़ा देश भारत में निवेश करने के लिए उत्सुक दिखाई पड़ता है । दुनिया को आज विश्व गुरु के साथ साथ विश्व नेतृत्व की क्षमता भी भारत में नज़र आने लगी है । भारत इस प्रकार अपनी कूटनीति आगे बढ़ा रहा है कि दो परस्पर दुश्मन देशों को एक ही मंच पर लाने की क्षमता दुनिया को भारत में दिखने लगी है । युद्ध रोकने की कूटनीति भी भारत में दिख रही है । ये विश्वास कमाना एक बड़ी जीत है ।ये आज के नेतृत्व द्वारा विश्व में भारत के प्रति पैदा किए गये विश्वास के कारण ही ये संभव हो पाया है...

पाती

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प्यारे बच्चों  आशा है आप और आपके परिवार में सभी स्वस्थ होंगे । इस महामारी ने पूरी मानव जाति के जीवन में उठा पटक मचाई है । सभी का जीवन प्रभावित हुआ है । इसके प्रभाव में आपका शैक्षिक जीवन भी आया है । लेकिन आप एक योद्धा की भाँति इस प्रभाव को सीमित कर सकते हैं । आपको केवल अपनी कक्षाओं में उपस्थित रहकर अध्यापकों के दिशा निर्देशों को मानकर  अपना जीवन संवारना है । शिक्षा ही एकमात्र हथियार है जो आपके जीवन में महामारी के प्रभाव को समाप्त करके आपको उच्च स्थान पर पहुँचा सकता है । आज आपके पास मौक़ा है पढ़ने का तो उसे मत खोना । क्योंकि ये मौक़ा बार बार नहीं मिलता । अपने आपको देखो और अपने परिवार को देखो फिर अपने सपनो को जिन्हें आप अपने मन में दृढ़ संकल्प लेकर ही पूरा कर सकते हैं । आज आपके कक्षा अध्यापक आपके पास न है लेकिन ऑनलाइन माध्यम से आपके पास आपके सारे अध्यापक उपलब्ध हैं । तो आप अपना संकल्प याद करो और अपने पास उपस्थित संसाधनों का प्रयोग करके अपनी शिक्षा पूर्ण कीजिए  । यही शिक्षा ही आपको पूरे जीवन में याद रहेगी ।  आपका कक्षाध्यापक  सतीश कुमार

DSSSB कंपीटिशन की तैयारी

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जानिए बार  बार परीक्षा देने पर  भी क्यों सफलता हाथ नहीं लगती है ? अक्सर युवाओं को सरकारी नौकरी के सपने देखते हुए देखा जाता है । लेकिन कितने युवा है जो अपने इस सपने को पूरा कर पाते हैं । कितने ही  युवाओं को तो सरकारी नौकरी कब कहाँ कैसे निकलेंगी ये भी नहीं पता होता है ।और पता भी चल जाए तो तैयारी कैसे करनी है कब करनी है कितनी करनी है कौन कौन सी बुक पढ़नी है कहाँ से मिलेगी नोट्स के लिए किस से कांटैक्ट करना है आदि सवाल मन में रहते हैं । इन सब के अलावा अक्सर बच्चे इस बात से भी ग्रस्त देखे गए हैं की ‘हमें सब पता है’ का टैग लगाकर घूमते हैं लेकिन जब परीक्षा का परिणाम निकलता है तो निल बटे सन्नाटा रह जाता है । फिर शुरू होता है खिसियानी बिल्ली खम्भा नौचे और नाच ना जाने आँगन टेढ़ा वाला खेल मतलब बहाने तलाशना कि किस के ऊपर परीक्षा में सफल ना होने का ठीकरा फोड़ा जाए । लेकिन सब कुछ करने के बाद भी हम अपनी कमियों को समझने का प्रयास नहीं करते और ना अपने आपको अपग्रेड करते हैं ।ज़रूरत है अपने आपको जज करने की कहाँ कमी रह जाती है जो बार बार परीक्षा देने के बाद भी सफलता हाथ न लगती है । परीक्षा पा...

5 सितंबर शिक्षक दिवस पर विशेष ( प्रलय और निर्माण अध्यापक की गोद में )

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" गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: "  अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं। गुरु शब्द अपने आप में एक सम्मान है ।बाकी सभी सम्मान तो इस सम्मान की पुनरावृति मात्र हैं ।गुरु शब्द अपने आप में इतना विस्तृत भाव अपने अंदर समेटे हैं कि बाकी सभी सम्मान इसके सामने नगण्य दिखाई देते हैं ।गुरु का अर्थ होता है बड़ा एवं विपरीत होता है लघु अर्थात छोटा I अर्थात गुरु शब्द गुरु और शिष्य दोनों में अपने आप में एक पद है और यह सब पद के अनुसार ही बने हुए हैं । रही बात सम्मान की तो वास्तविक सम्मान तो एक अध्यापक को विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थी जीवन के उपरांत दिया जाने वाला सम्मान है । जब एक विद्यार्थी कहीं सफल होता है और अपने अध्यापक को याद करके उसे सम्मान देता है वही एक शिक्षक का वास्तविक सम्मान होता है । गुरु अर्थात शिक्षक और 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस । हम प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं गुरु की महत्ता को ब...

कोरोना के बाद विद्यालय प्रवेश

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प्रिय छात्रों ,  अति हर्ष का विषय है कि कठिन समय के दौर को पार करके हम फिर से विद्यालय में उपस्थित होने जा रहे हैं । लेकिन अपने लाल को विद्यालय भेजते हुए आज भी आपके अभिभावकों के दिमाग़ में आपकी सुरक्षा को लेकर भय है कि मेरा लाल आज घर वापस आकर बीमार तो नहीं लग रहा है । आपकी सुरक्षा की चिंता आपके अभिभावकों की तरह अध्यापकों को भी है ।  आपकी छोटी छोटी आदतों के सुधार से ये चिन्ताएँ कम हो सकती हैं । आपसे अपेक्षा है कि आप विद्यालय में नए परिवेश में नये दिशा निर्देशों को भली प्रकार से मानेंगे एवं स्वयं को और अपने दोस्तों को सुरक्षित रखेंगे । विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व कोरोना बीमारी ने बढ़ा दिया है ।  अनुशासन के लिए कुछ सामान्य दिशा निर्देश निम्न प्रकार से हैं । विद्यालय प्रवेश करते समय थर्मल स्क्रीनिंग में अवश्य हिस्सा लें।जिससे आपके शरीर का तापमान नियमित रूप से जाँचा जा सके । मास्क अवश्य पहनें ।लापरवाही ना करें । 2 गज दूरी मास्क है जरूरी के नियम को अवश्य माने  यदि हो सके तो अपना खुद का सेनीटाईज़र साथ रखें । भीड़ का हिस्सा ना बनें । कोई प्रार्थना सभा या क्रियाकलाप ...

जीवन - एक परीक्षा ।

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 मनुष्य के लिये जिन्दगी अपने आप मे एक बहुत बड़ी  परीक्षा है जिसमें उसे जीवन के अनेक पड़ावों पर बहुत सारी परीक्षाएं देनी पडती हैं। जो इन  परीक्षाओं में सफल वही कामयाबियों के शिखर पर होता है। आग लगने पर कुआं खोदने की कहावत तो आपने सुनी ही  होगी कि किस प्रकार हम जब बिना तैयारी के किसी जरुरत के समय कैसे हाय तौबा  मचाते हैं और परेशान होतें हैं। जीवन मे किसी भी परीक्षा की घड़ी में  धैर्य और बुद्धि ही सबसे बडे  हथियार हैं। लेकिन ये भी बिना पूर्व तैयारी के समय पर साथ छोड सकते हैं। जिस प्रकार युध से पूर्व एक योद्धा अपने हथियारों को पैना करता है उसी प्रकार से हमे भी अपनी तैयारियां पहले से ही पूरी कर के चलना चाहिए । आलस्य जीवन में सफलता प्राप्त करने में सबसे बड़ा रोड़ा है। https://satlekhani.in/ यदि आप मेरी website पर जाना चाहते है तो यहाँ क्लिक करें 🙏 https://satlekhani.in/ अप्डेट पाने के लिए पेज follow अवश्य करें 🙏

आज़ादी - वास्तविकता

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आज़ादी - वास्तविकता  आज आजादी की पूर्व संध्या पर दिल्ली जैसे शहर में ध्वजारोहण करके कुछ विद्वान् साथियों, जिसमे विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों, जातियों और वर्गों के लोग थे, उनके  स्टेज पर दिए गए सम्बोधनों को सुनते हुए कई बातें मन मस्तिष्क में गूंज रही हैं। गुलामी का अनुभव करने वाले को ही आजादी का अनुभव होगा ये सत्य है। आज की पीढ़ी में  आजादी से पहले जन्म लेने वाले कुछ ही लोग बचे हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई देखी  है या गुलामी का अनुभव किया है।  अपने देश में अपना झंडा उठाने तक की आजादी उस समय कितनी पीड़ादायक रही होगी ये अनुभव आज ध्वजारोहण करते हुए महसूस नहीं हो पाता  है।  फिर भी अपनी आने वाली पीढ़ियों को इस बात का एहसास करने की कोशिश जारी हैजारी रहेगी कि  हमारे देश के कितने वीर सपूतों ने इस दिन के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज उसी बलिदान को याद करते हुए हम अपने देश का तिरंगा ऊँचा करके बड़ी शान से भारत माता की जय और जय हिन्द का नारा  बुलंद करते हैं।   आज देश कई मोर्चों पर लड़ रहा है देश के बाहर पडोसी दुश्मन देशों से और अंदर  को...

सुलेख-एक सुन्दरता ये भी ।

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  सुलेख (  Calligraphy  ) क्या आप अपनी लिखावट सुधारना चाहते हैं ?  खुद लिखें और ख़ुदा भी ना जाने कि क्या लिखा है। कभी कभी कई लोगों के साथ ऐसा भी होता है ।  क्या कभी किसी को आपकी हैंडराइटिंग देखकर भ्रम हुआ है कि आप डॉक्टर तो नहीं हैं ? क्या स्कूल में अक्सर आपको आपकी लिखावट के कारण शर्मिंदा होना पड़ता है ? या कभी कभी आपकी लिखावट के लिए आपको ये सुन ने को मिल जाता है कि क्या कीड़े मकोड़े मार कर नोट्बुक में रख दिए ? तो आपको बिल्कुल भी शर्मिंदा हताश या निराश होने की आवश्यकता नहीं है।  अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन जी ने भी अपनी आत्मकथा में अपनी ख़राब लिखावट के लिए अफ़सोस जताया है।  बताया जाता है कि महात्मा गाँधी जी का भी लेख अच्छा नहीं था।  और  क्योंकि इसे हल्की फुलकी सी विधियों द्वारा आसानी से सुंदर बनाया जा सकता है।  So be positive always.   23 जनवरी को वर्ल्ड हैंड राइटिंग डे मनाया जाता है । लिखावट के अध्ध्यन को ग्राफ़ोलोजी कहा जाता है । ग्राफोलॉजी में केवल अक्षरों की बनावट का ही विशेष महत्त्व है उसकी क्या भाषा है और...

छात्रों के लिए अध्यापक के मन की बात( in form of a letter)

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  (Work from home)                                                                            प्रिय छात्रों , सबसे पहले , सभी को सुप्रभात ! आज आपसे बात करने का मन हुआ जैसे कक्षा में जाते ही किया करता था ( actully i am missing my class )। मुझे लगता है आप भी कर रहे होंगे । समय ही ऐसा आया है । लेकिन हौसलों के आगे ये भी गुज़र जाएगा । इस कठिन समय को अपने आपको तराशने में लगाओ जिससे इस समय की उपयोगिता आपके जीवन को नयी दिशा प्रदान करे । कई बार लगता है कि ये कार्य बड़ा कठिन है कैसे होगा ? कैसे करूँगा ? कितनी मेहनत लगेगी ? हम हताश से होने लगते हैं ।और हम उस कार्य में मन न लगा पाते हैं । जिससे कार्य की गुणवत्ता गिर जाती है और विद्यार्थी को मन से कार्य नहीं करने से उस कार्य का फल काग़ज़ पर तो मिलता है परंतु  जिस उद्देश्यों को लेकर ...