नशा और नशाखोरी – छात्र जीवन से समाज तक एक खामोश संकट सतलेखनी ✍️ आज का युवा ऊर्जा, सपनों और संभावनाओं से भरा हुआ है। लेकिन इसी युवा वर्ग का एक हिस्सा धीरे-धीरे ऐसी आदतों की ओर बढ़ रहा है, जो उसके भविष्य को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं। आज का समय तेज़ी, प्रतिस्पर्धा और दिखावे का समय है। इस दौड़ में सबसे ज्यादा प्रभावित अगर कोई वर्ग हो रहा है, तो वह है युवा और विद्यार्थी वर्ग। “नशा” जो कभी एक बुरी आदत माना जाता था, आज धीरे-धीरे एक सामाजिक संकट का रूप लेता जा रहा है। स्कूल और कॉलेज जैसे पवित्र शिक्षा स्थलों में भी नशाखोरी का बढ़ना एक चिंताजनक संकेत है। यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि परिवार, समाज और देश के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। विद्यालय और महाविद्यालय जैसे स्थान, जहाँ जीवन को दिशा मिलनी चाहिए, वहीं आज कई जगहों पर नशाखोरी की छाया दिखाई देने लगी है। यह स्थिति केवल चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। नशा केवल शराब या सिगरेट तक सीमित नहीं है। यह किसी भी ऐसी चीज़ का सेवन है, जो व्यक्ति के सोचने-समझन...
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