निराशा नहीं, एक और मौका: NIOS से नई शुरुआत सभी छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित हो चुके हैं। कुछ छात्रों के परिणाम उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप आए हैं, तो कुछ के लिए ये निराशाजनक भी रहे होंगे। लेकिन यहाँ एक बात समझना बहुत ज़रूरी है—एक परीक्षा में असफलता, जीवन की असफलता नहीं होती। खासतौर पर National Institute of Open Schooling (NIOS) उन छात्रों के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान करता है, जो किसी कारणवश अपनी नियमित पढ़ाई में पीछे रह गए हैं। दिल्ली सरकार के विद्यालयों में विशेष अवसर दिल्ली सरकार के विद्यालयों में यदि कोई छात्र कक्षा 9 में लगातार दो बार अनुत्तीर्ण हो जाता है, तो उसे पूरी तरह से सिस्टम से बाहर नहीं किया जाता। बल्कि उसे एक नया अवसर दिया जाता है। विद्यालय में रजिस्टर्ड रहते हुए ही छात्रों के NIOS के माध्यम से कक्षा 10 के फॉर्म भरवाए जाते हैं। इसके लिए हर स्कूल में एक नोडल इंचार्ज नियुक्त होता है, जो छात्रों और अभिभावकों को पूरी प्रक्रिया में सहायता करता है। सरकार द्वारा फीस में सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे आर्थिक बोझ कम हो जाता है। सुविधाजनक व्यवस्था और सहयोग कई विद्यालयों को मिलाकर एक...
नशा और नशाखोरी – छात्र जीवन से समाज तक एक खामोश संकट सतलेखनी ✍️ आज का युवा ऊर्जा, सपनों और संभावनाओं से भरा हुआ है। लेकिन इसी युवा वर्ग का एक हिस्सा धीरे-धीरे ऐसी आदतों की ओर बढ़ रहा है, जो उसके भविष्य को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं। आज का समय तेज़ी, प्रतिस्पर्धा और दिखावे का समय है। इस दौड़ में सबसे ज्यादा प्रभावित अगर कोई वर्ग हो रहा है, तो वह है युवा और विद्यार्थी वर्ग। “नशा” जो कभी एक बुरी आदत माना जाता था, आज धीरे-धीरे एक सामाजिक संकट का रूप लेता जा रहा है। स्कूल और कॉलेज जैसे पवित्र शिक्षा स्थलों में भी नशाखोरी का बढ़ना एक चिंताजनक संकेत है। यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि परिवार, समाज और देश के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। विद्यालय और महाविद्यालय जैसे स्थान, जहाँ जीवन को दिशा मिलनी चाहिए, वहीं आज कई जगहों पर नशाखोरी की छाया दिखाई देने लगी है। यह स्थिति केवल चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। नशा केवल शराब या सिगरेट तक सीमित नहीं है। यह किसी भी ऐसी चीज़ का सेवन है, जो व्यक्ति के सोचने-समझन...
सभी छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा चुके हैं । कुछ के परिणाम उनकी उम्मीद के अनुरूप आए हैं तो कुछ के निराशाजनक । परंतु निराश होने की आवश्यकता नहीं है । दिल्ली सरकार के विद्यालयों में कक्षा नौवीं में दो साल लगातार अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों के लिए एक मौक़ा विभाग द्वारा दिया जाता है । विद्यालय में ही रजिस्टर्ड रहते हुए एनआईओएस के साथ मिलकर इन्हें कक्षा दसवीं के फॉर्म भरवाए जातें हैं । विद्यालय में एक नोडल इंचार्ज होता है जिसकी मदद से आप एनआईओएस का फॉर्म भर सकते हैं । फीस में सरकार द्वारा सब्सिडी भी प्रदान की जाती है । कई विद्यालयों का एक क्लस्टर बना होता है जो समय समय पर छात्रों को अलग अलग नोटिफिकेशन जारी करता है जैसे कब प्रैक्टिकल हैं , कब एडमिट कार्ड मिलेंगे, एग्जाम सेंटर कहाँ है , मार्कशीट एवं सर्टिफिकेट्स भी संबंधित विद्यालय में पहुँचा दिए जाते है ।जिस से अभिभावकों एवं छात्रों को काफ़ी आसानी होती है । कक्षा दसवीं एनआईओएस से पास करने के बाद कक्षा ११ में वापस उसी विद्यालय में आपको एडमिशन भी दिया जाता है । सबसे बड़ा सवाल क्या NIOS की मान्यता है ? क्य...
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