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विद्यालय में निर्वाचन प्रक्रिया: जिम्मेदार नागरिक और सशक्त राष्ट्र की नींव

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विद्यालय में निर्वाचन प्रक्रिया का महत्व, उसका व्यापक योगदान एवं पाठ्यक्रम में समावेशन के लाभ निर्वाचन प्रक्रिया किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है। यह वह माध्यम है जिसके द्वारा नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं और शासन प्रणाली को दिशा प्रदान करते हैं। सामान्यतः इसे केवल राष्ट्रीय या राज्य स्तर के चुनावों तक सीमित समझा जाता है, परंतु यदि इस प्रक्रिया को विद्यालय स्तर पर लागू किया जाए, तो यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विद्यालय में कक्षा मॉनिटर, हाउस कैप्टन या स्कूल कैप्टन के चुनाव के माध्यम से विद्यार्थियों को लोकतंत्र का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है, जो उनके व्यक्तित्व और सोच को गहराई से प्रभावित करता है। विद्यालय स्तर पर निर्वाचन प्रक्रिया का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और अनुशा सन की भावना विकसित करती है। जब छात्र चुनाव प्रक्रिया में भाग लेते हैं—चाहे वे उम्मीदवार हों या मतदाता—तो वे नियमों का पालन करना, समय का महत्व समझना और सामूहिक निर्णय का सम्मान करना सीखते हैं। उम्मीदवार ...

शिक्षा में एनआईओएस की भूमिका

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सभी छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा चुके हैं । कुछ के परिणाम उनकी उम्मीद के अनुरूप आए हैं तो कुछ के निराशाजनक । परंतु निराश होने की आवश्यकता नहीं है । दिल्ली सरकार के विद्यालयों में कक्षा नौवीं में दो साल लगातार अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों के लिए एक मौक़ा विभाग द्वारा दिया जाता है । विद्यालय में ही रजिस्टर्ड रहते हुए एनआईओएस के साथ मिलकर इन्हें कक्षा दसवीं के फॉर्म भरवाए जातें हैं । विद्यालय में एक नोडल इंचार्ज होता है जिसकी मदद से आप एनआईओएस का फॉर्म भर सकते हैं । फीस में सरकार द्वारा सब्सिडी भी प्रदान की जाती है ।  कई विद्यालयों का एक क्लस्टर बना होता है जो समय समय पर छात्रों को अलग अलग नोटिफिकेशन जारी करता है जैसे कब प्रैक्टिकल हैं , कब एडमिट कार्ड मिलेंगे, एग्जाम सेंटर कहाँ है , मार्कशीट एवं सर्टिफिकेट्स भी संबंधित विद्यालय में पहुँचा दिए जाते है  ।जिस से अभिभावकों एवं छात्रों को काफ़ी आसानी होती है ।  कक्षा दसवीं एनआईओएस से पास करने के बाद कक्षा ११ में वापस उसी विद्यालय में आपको एडमिशन भी दिया जाता है ।  सबसे बड़ा सवाल  क्या NIOS की मान्यता है ? क्य...

पाती

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प्यारे बच्चों  आशा है आप और आपके परिवार में सभी स्वस्थ होंगे । इस महामारी ने पूरी मानव जाति के जीवन में उठा पटक मचाई है । सभी का जीवन प्रभावित हुआ है । इसके प्रभाव में आपका शैक्षिक जीवन भी आया है । लेकिन आप एक योद्धा की भाँति इस प्रभाव को सीमित कर सकते हैं । आपको केवल अपनी कक्षाओं में उपस्थित रहकर अध्यापकों के दिशा निर्देशों को मानकर  अपना जीवन संवारना है । शिक्षा ही एकमात्र हथियार है जो आपके जीवन में महामारी के प्रभाव को समाप्त करके आपको उच्च स्थान पर पहुँचा सकता है । आज आपके पास मौक़ा है पढ़ने का तो उसे मत खोना । क्योंकि ये मौक़ा बार बार नहीं मिलता । अपने आपको देखो और अपने परिवार को देखो फिर अपने सपनो को जिन्हें आप अपने मन में दृढ़ संकल्प लेकर ही पूरा कर सकते हैं । आज आपके कक्षा अध्यापक आपके पास न है लेकिन ऑनलाइन माध्यम से आपके पास आपके सारे अध्यापक उपलब्ध हैं । तो आप अपना संकल्प याद करो और अपने पास उपस्थित संसाधनों का प्रयोग करके अपनी शिक्षा पूर्ण कीजिए  । यही शिक्षा ही आपको पूरे जीवन में याद रहेगी ।  आपका कक्षाध्यापक  सतीश कुमार

कोरोना के बाद विद्यालय प्रवेश

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प्रिय छात्रों ,  अति हर्ष का विषय है कि कठिन समय के दौर को पार करके हम फिर से विद्यालय में उपस्थित होने जा रहे हैं । लेकिन अपने लाल को विद्यालय भेजते हुए आज भी आपके अभिभावकों के दिमाग़ में आपकी सुरक्षा को लेकर भय है कि मेरा लाल आज घर वापस आकर बीमार तो नहीं लग रहा है । आपकी सुरक्षा की चिंता आपके अभिभावकों की तरह अध्यापकों को भी है ।  आपकी छोटी छोटी आदतों के सुधार से ये चिन्ताएँ कम हो सकती हैं । आपसे अपेक्षा है कि आप विद्यालय में नए परिवेश में नये दिशा निर्देशों को भली प्रकार से मानेंगे एवं स्वयं को और अपने दोस्तों को सुरक्षित रखेंगे । विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व कोरोना बीमारी ने बढ़ा दिया है ।  अनुशासन के लिए कुछ सामान्य दिशा निर्देश निम्न प्रकार से हैं । विद्यालय प्रवेश करते समय थर्मल स्क्रीनिंग में अवश्य हिस्सा लें।जिससे आपके शरीर का तापमान नियमित रूप से जाँचा जा सके । मास्क अवश्य पहनें ।लापरवाही ना करें । 2 गज दूरी मास्क है जरूरी के नियम को अवश्य माने  यदि हो सके तो अपना खुद का सेनीटाईज़र साथ रखें । भीड़ का हिस्सा ना बनें । कोई प्रार्थना सभा या क्रियाकलाप ...