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पाती

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प्यारे बच्चों  आशा है आप और आपके परिवार में सभी स्वस्थ होंगे । इस महामारी ने पूरी मानव जाति के जीवन में उठा पटक मचाई है । सभी का जीवन प्रभावित हुआ है । इसके प्रभाव में आपका शैक्षिक जीवन भी आया है । लेकिन आप एक योद्धा की भाँति इस प्रभाव को सीमित कर सकते हैं । आपको केवल अपनी कक्षाओं में उपस्थित रहकर अध्यापकों के दिशा निर्देशों को मानकर  अपना जीवन संवारना है । शिक्षा ही एकमात्र हथियार है जो आपके जीवन में महामारी के प्रभाव को समाप्त करके आपको उच्च स्थान पर पहुँचा सकता है । आज आपके पास मौक़ा है पढ़ने का तो उसे मत खोना । क्योंकि ये मौक़ा बार बार नहीं मिलता । अपने आपको देखो और अपने परिवार को देखो फिर अपने सपनो को जिन्हें आप अपने मन में दृढ़ संकल्प लेकर ही पूरा कर सकते हैं । आज आपके कक्षा अध्यापक आपके पास न है लेकिन ऑनलाइन माध्यम से आपके पास आपके सारे अध्यापक उपलब्ध हैं । तो आप अपना संकल्प याद करो और अपने पास उपस्थित संसाधनों का प्रयोग करके अपनी शिक्षा पूर्ण कीजिए  । यही शिक्षा ही आपको पूरे जीवन में याद रहेगी ।  आपका कक्षाध्यापक  सतीश कुमार

5 सितंबर शिक्षक दिवस पर विशेष ( प्रलय और निर्माण अध्यापक की गोद में )

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" गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: "  अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं। गुरु शब्द अपने आप में एक सम्मान है ।बाकी सभी सम्मान तो इस सम्मान की पुनरावृति मात्र हैं ।गुरु शब्द अपने आप में इतना विस्तृत भाव अपने अंदर समेटे हैं कि बाकी सभी सम्मान इसके सामने नगण्य दिखाई देते हैं ।गुरु का अर्थ होता है बड़ा एवं विपरीत होता है लघु अर्थात छोटा I अर्थात गुरु शब्द गुरु और शिष्य दोनों में अपने आप में एक पद है और यह सब पद के अनुसार ही बने हुए हैं । रही बात सम्मान की तो वास्तविक सम्मान तो एक अध्यापक को विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थी जीवन के उपरांत दिया जाने वाला सम्मान है । जब एक विद्यार्थी कहीं सफल होता है और अपने अध्यापक को याद करके उसे सम्मान देता है वही एक शिक्षक का वास्तविक सम्मान होता है । गुरु अर्थात शिक्षक और 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस । हम प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं गुरु की महत्ता को ब...

छात्रों के लिए अध्यापक के मन की बात( in form of a letter)

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  (Work from home)                                                                            प्रिय छात्रों , सबसे पहले , सभी को सुप्रभात ! आज आपसे बात करने का मन हुआ जैसे कक्षा में जाते ही किया करता था ( actully i am missing my class )। मुझे लगता है आप भी कर रहे होंगे । समय ही ऐसा आया है । लेकिन हौसलों के आगे ये भी गुज़र जाएगा । इस कठिन समय को अपने आपको तराशने में लगाओ जिससे इस समय की उपयोगिता आपके जीवन को नयी दिशा प्रदान करे । कई बार लगता है कि ये कार्य बड़ा कठिन है कैसे होगा ? कैसे करूँगा ? कितनी मेहनत लगेगी ? हम हताश से होने लगते हैं ।और हम उस कार्य में मन न लगा पाते हैं । जिससे कार्य की गुणवत्ता गिर जाती है और विद्यार्थी को मन से कार्य नहीं करने से उस कार्य का फल काग़ज़ पर तो मिलता है परंतु  जिस उद्देश्यों को लेकर ...