परीक्षाओं में बच्चों द्वारा मुख्यतः की जाने वाली ग़लतियाँ



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 विद्यार्थी का सफल या असफ़ल होना उसकी परीक्षा देने पर निर्भर करता है। अभी तक ऐसी परीक्षा व्यवस्था नहीं की जा सकी है जो परीक्षार्थी के साथ की परिस्थितियों के आधार पर उसकी योग्यता का निर्धारण कर सके ।किसी भी छात्र की अंक पत्रिका पर उन परिस्थितियों का उल्लेख नहीं मिलता है कि उसने कैसे कैसे अपनी पढ़ाई पूरी की है ।परीक्षा भवन में उसकी मानसिक स्तिथि कैसी है केवल और केवल  उसके द्वारा लिखे गए प्रश्नोत्तर के आधार पर ही परीक्षार्थी का मूल्यांकन किया जाता है। जब मूल्यांकन लिखाई के आधार पर ही होना है तो सबसे बेहतर विकल्प है पूर्व में हुई परीक्षा में toppar रहे छात्रों की answer sheets की copy ।परीक्षा में topper रहे छात्रों की कापियाँ सभी के अध्ययन हेतु नेट पर उपलब्ध हैं । ये कापियाँ सभी के लिए मार्गदर्शन करती हैं कि किस प्रकार लिखने से परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त किए जा सकते हैं ।और अपनी कमियाँ साफ़ साफ़ आइने की तरह दिखाई देने लगती हैं । समय प्रबंधन में गलती: परीक्षा में समय प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर छात्र समय प्रबंधन में गलती कर देते हैं और परीक्षा में सभी प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ रहते हैं।

कुछ सामान्यतौर पर परीक्षा भवन में होने वाली ग़लतियाँ ।

प्रश्न को  अच्छी तरह से बिना पढ़े जवाब लिखना -

प्रश्न का उत्तर लिखने की जल्दबाज़ी में अक्सर हम पूरा प्रश्न भी नहीं पढ़ते हैं और अधूरे पढ़े प्रश्न से ही अनुमान लगा लेते हैं कि क्या पूछा गया होगा और उसी आधार पर उत्तर लिखने में लग जाते हैं । बिना पूरा पढ़े लिखने का अर्थ अंधेरे में तीर चलाने जैसा है ।

अक्सर परीक्षार्थी प्रश्नपत्र में सबसे आसान प्रश्न को अंत में करने के लिए छोड़ देते हैं और अंत में समयाभाव के कारण ये आते हुए प्रश्न भी बिना किए ही रह जाते हैं । अतः जो आते है उन्हें तीव्र गति से पहले करें । और परीक्षा के अंतिम क्षणों  के दबाव से मुक्त रहें ।

सामान्यतः परीक्षार्थी ( विशेषतः गणित , बही खाता या अन्य अंकीय गणना वाले विषय )  प्रश्नों में गणना तो बहुत अच्छे से करते  हैं लेकिन गणना करने से पहले प्रश्न से डाटा ग़लत उतार लेते हैं प्रश्न हल करते हैं और सारा समय व्यर्थ चला जाता है अतः ग़लत संख्या लिखने से बचें । कभी कभी ग़लत data होने से गणना में सामान्य से अधिक वक़्त लगता है और सारा व्यर्थ जाता है ।

बिना जाँचे answer sheet परीक्षक को जमा करना ।

हम सभी मानव हैं और मानवीय भूल सामान्य प्रक्रिया है । कभी कभी हमारी आँख और हाथ का तालमेल मस्तिष्क के अनूरूप नहीं होता । सोचते कुछ हैं देखते कुछ हैं और लिखा कुछ जाता है । जिस से अक्सर बहुत से ग़लतियाँ हमारे द्वारा लिखे उत्तर में रह जाती हैं इसलिए परीक्षा कक्ष के इंचार्ज को अपनी कापी देने से पहले एक बार अवश्य जाँच लें । 

प्रश्नों को ध्यान से न पढ़ना: परीक्षा में प्रश्नों को ध्यान से पढ़ना बहुत जरूरी है। अक्सर छात्र प्रश्नों को ध्यान से न पढ़कर गलत उत्तर दे देते हैं।

बहुत छोटी लिखाई। या टेढ़ी मेढ़ी लिखाई । सुंदर दिखता माल पहले बिकता है चाहे उसकी गुणवत्ता कमतर ही क्यों ना हो । और अच्छी गुणवत्ता का माल सिर्फ़ अच्छा ना दिखने के कारण बिना बिके रह जाता है । अर्थात् आपकी लिखाई आपके विचारों का आइना है । अपनी लिखाई सुधारने के लिए सदैव प्रयासरत रहें । 

प्रश्नों के लिए प्रस्तावित अंक को बग़ैर देखे उत्तर लिखना ।

तैयारी में कमी: परीक्षा में तैयारी बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर छात्र तैयारी में कमी कर देते हैं और परीक्षा में असफल हो जाते हैं।

घबराना नहीं । जो होना है होगा भयभीत होने से सही नहीं होगा बल्कि सामान्य होने से ज़्यादा बेहतर क्षमता से प्रश्न हल किए जा सकते हैं ।घबराने से नहीं । उत्तरों में गलती: परीक्षा में उत्तरों में गलती करना बहुत आम बात है। अक्सर छात्र उत्तरों में गलती कर देते हैं और परीक्षा में कम अंक प्राप्त करते हैं।

परीक्षा पूर्व रात में पूरी पूरी रात पढ़ना । सामान्यतः विद्यार्थी परीक्षा से पूर्व पूरी पूरी रात पढ़ाई करते हैं । जबकि पढ़ाई नियमित अध्ययन से ही की जाती है । नींद पूरी नहीं होने से मानसिक एवं शारीरिक थकान से परीक्षा भवन में आप अपनी पूरी क्षमता से उत्तर नहीं लिख पातें हैं । अपर्याप्त नींद कई और ग़लतियों का भी  कारण बनती है । 

प्रश्नों के उत्तर लिखते हुए दो प्रश्नों के उत्तर के बीच में  उचित ख़ाली स्थान या मार्जिन नहीं छोड़ना । जिस से जाँच के दौरान उत्तर को नम्बर नहीं मिलने की प्रबल सम्भावना हो जाती है ।

उत्तर के लिखने से पूर्व उसका क्रमांक नहीं लिखना या सही नहीं लिखना ।जब किसी प्रश्न का उत्तर हमें बहुत अच्छे से आता है तो उसका  उत्तर लिखने की उत्सुकता में हम उसका क्रमांक लिखना भी भूल जातें हैं जिस से परीक्षक उसे जाँच नहीं पाता है 

बिना तैयारी के उत्तर लिखने लगना।

किसी भी प्रश्न का उत्तर (विशेषतः लम्बे उत्तर )लिखने से पूर्व उनके मुख्य बिंदुओं को पेंसिल से ऊपर एक किनारे पर कुछ क्षणों में लिख कर फिर योजना  बनाकर लिखें । अचानक लिखने से विचार आगे पीछे हो जातें हैं या मुख्य बिंदु छूट जातें हैं और उनका  प्रभाव कम हो जाता है ।


समय प्रबंधन में लापरवाही। समयाभाव ।

परीक्षा में सभी को सामान्यतः समान समय मिलता है लेकिन फिर भी कई परीक्षार्थी समयाभाव का रोना रोते हैं कि समय ही नहीं मिला और कई प्रश्न छूट गए । ये तो सभी को पता है कि समय पंख लगाकर उड़ता है लेकिन परीक्षा के समय तो जैसे जेट इंजन लगाकर उड़ता है। यहाँ समय का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक हो जाता है । किस प्रश्न को कितना समय देना है । कितना बड़ा उत्तर लिखना है ये भी एक यक्ष प्रश्न परीक्षार्थी के सामने होता है ।

स्वास्थ्य का विशेष ध्यान 

परीक्षा के समय हम अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पातें हैं जिस से मस्तिष्क पूरी क्षमता से कार्य नहीं करता । अतः खाने पीने का ध्यान अवश्य रखें । 

व्याकरणीय ग़लतियाँ कम से कम करें ।

तनाव से दूरी । 

परीक्षा के समय तनाव से दूर रहें ।

अपनी पढ़ाई को नियमित रखना जिस से 


 तनाव और दबाव: परीक्षा में तनाव और दबाव बहुत आम बात है। अक्सर छात्र तनाव और दबाव के कारण परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

नियमों का पालन न करना: परीक्षा में नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। अक्सर छात्र नियमों का पालन न करके परीक्षा में अनुचित तरीके से उत्तर देते हैं और परीक्षा में असफल हो जाते हैं।

उत्तर पत्रिका को ध्यान से न भरना: परीक्षा में उत्तर पत्रिका को ध्यान से भरना बहुत जरूरी है। अक्सर छात्र उत्तर पत्रिका को ध्यान से न भरकर परीक्षा में कम अंक प्राप्त करते हैं।. प्रश्नों का चयन न करना: परीक्षा में प्रश्नों का चयन करना बहुत जरूरी है। अक्सर छात्र प्रश्नों का चयन न करके परीक्षा में कम अंक प्राप्त करते हैं।



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