सुलेख-एक सुन्दरता ये भी ।


 सुलेख (  Calligraphy  )

क्या आप अपनी लिखावट सुधारना चाहते हैं ? 

खुद लिखें और ख़ुदा भी ना जाने कि क्या लिखा है। कभी कभी कई लोगों के साथ ऐसा भी होता है ।  क्या कभी किसी को आपकी हैंडराइटिंग देखकर भ्रम हुआ है कि आप डॉक्टर तो नहीं हैं ? क्या स्कूल में अक्सर आपको आपकी लिखावट के कारण शर्मिंदा होना पड़ता है ? या कभी कभी आपकी लिखावट के लिए आपको ये सुन ने को मिल जाता है कि क्या कीड़े मकोड़े मार कर नोट्बुक में रख दिए ? तो आपको बिल्कुल भी शर्मिंदा हताश या निराश होने की आवश्यकता नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन जी ने भी अपनी आत्मकथा में अपनी ख़राब लिखावट के लिए अफ़सोस जताया है। बताया जाता है कि महात्मा गाँधी जी का भी लेख अच्छा नहीं था।  और  क्योंकि इसे हल्की फुलकी सी विधियों द्वारा आसानी से सुंदर बनाया जा सकता है।  So be positive always.  23 जनवरी को वर्ल्ड हैंड राइटिंग डे मनाया जाता है । लिखावट के अध्ध्यन को ग्राफ़ोलोजी कहा जाता है । ग्राफोलॉजी में केवल अक्षरों की बनावट का ही विशेष महत्त्व है उसकी क्या भाषा है और  क्या भाव है इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है । 

जैसे पूरे विश्व में हर व्यक्ति की हाथ की लकीरें, अँगुलियों के निशान (फिंगर प्रिंट्स ) अलग अलग होते हैं। उसी प्रकार से हमारी लिखावट भी किसी से मेल नहीं  खाती  है।  बहुत सारी विभिन्नताएं इसमें होती हैं।  और ये विभिन्नताएं ही लिखाई करने वाले के रहन, सहन, आदतें, व्यवहार, विचारधारा एवं जीवन मूल्यों के विषय में सबकुछ बताती है। लिखावट के अध्ययन (ग्राफोलॉजी ) से एक्सपर्ट्स लिखाई  लिखने वाले के बारे में बहुत कुछ बता देते हैं।  आजकल इस अध्ययन का प्रयोग आपराधिक पृष्ठ्भूमि  वाले लोगों यानि मुख्यतः जेल के कैदियों पर किया जा रहा है। 

आपकी हाथों की लिखाई आपके व्यक्तित्व को भी दर्शाती है । हैंडराइटिंग विशेषज्ञ आपके लेखन की बनावट के आधार पर आपका व्यक्तित्व का चित्रण तक कर देते हैं ।यह चित्रण इस प्रकार आपके लेखन के आधार पर आपके अंतर्मन/ व्यक्तित्व की उस रूपरेखा को भी दर्शाता है जिसे  अक्सर लोग अपने बाहरी बनावटी व्यवहार और पहनावे से छिपा लेते हैं । 

कई महान  व्यक्ति अपनी कला के बल पर बहुत ऊँचे मुकाम पर पहुंचे हैं।  जिनमे  उनकी प्रतिभा और मेहनत के साथ साथ लगन का भी विशेष महत्त्व रहा होता है।  जैसे सचिन तेंदुलकर , लता मंगेशकर।  लेखन में मात्र कुछ हलके फुल्के प्रयासों से ही अच्छा मुकाम पाया जा सकता है। हर व्यक्ति की अपनी अलग पहचान होती है। और सुन्दर लेखन भी अपने आप में एक कला है। इस कला में खोकर हर किसी को आत्म संतुष्टि का एहसास होता है जैसा हर कलाकार को होता है। शांत मन से लिखने से लिखावट में एक अलग ही छाप दिखने लगती है।जिस प्रकार हर कोई चाहता है कि वह सुन्दर दिखे और सभी उसे देखकर उसकी प्रशंसा करें उसी  प्रकार हर कोई चाहता है कि उसके हाथों की सुंदर लिखाई को देखकर हर कोई वाह वाह करें । कभी कभी तो दूसरों की हैंड राइटिंग को देखकर जलन महसूस होती है  हमारी राइटिंग सुन्दर या अच्छी क्यों नहीं है लेकिन इसमें निराश होने जैसा कुछ नहीं है यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाये तो आपकी राइटिंग से दूसरों को जलन होने लगेगी और आपको वाहवाही मिलने लगेगी। आपकी लिखावट आपके शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन को भी  प्रभावित कर सकता है। 

सुन्दर लिखाई के लिए 

1 कलम पकड़ने का तरीका - कलम हमेशा अंगूठे और तर्जनी अंगुली से पकड़नी चाहिए। साथ  मध्यमा  अंगुली से सहारा देते हुए कलम को नियंत्रित किया जाता है। 

2 हाथ की स्थिति  - लिखते समय आपके हाथ को किसी न किसी  सतह पर  आरामदायक स्थिति में होना चाहिए।
  
3 बैठने का स्टाइल - कमर सीधी करके बैठने की स्टाइल में कोहनी को मेज पर आरामदायक स्थिति में  रखकर ही लिखना शुरू करना चाहिए। 

     उपरोक्त बातें लेखन पर बहुत ज्यादा असर डालती है 





अँगुलियों के  लिए कुछ व्यायाम 


१ मिटटी के साथ व्यायाम (क्ले मॉडलिंग में प्रयोग होने वाली ) के साथ अपनी अँगुलियों का  व्यायाम कराना। अँगुलियों से गीली मिटटी को गूंथना एवं अलग अलग मॉडल बनाना जिस से अपनी अंगुली की मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है एवं लेखन में सहायक होती हैं। 

२ रबर बैंड  में अपने हाथ की अँगुलियों और अंगूठे को डालकर छल्ले को बाहर की तरफ दबाव बनाने से भी आपके हाथ की अँगुलियों की मांसपेशियों की एक्सरसाइज होती है। 

३ एक ट्रे में सूखी रेत भरकर भी आप अपनी कलात्मक लेखन शैली को विकसित कर सकते हो। जैसे हवा में लिख रहे हों।  ( इस से पेपर की बचत भी होती है )
 


 कुछ सामान्य बातें 


१ दो शब्दों के बीच में एक सामान एक 0 (शून्य )  के समान  स्थान ही छोड़ा जाये।  एक समानता अच्छी राइटिंग का गुण  है। 
 
२ अभ्यास करते समय यदि ग्राफ पेपर का प्रयोग किया जाये तो लेखन में एकरूपता आती है। 

३ फ्लो में लिखने का अभ्यास करना चाहिए।  

४ वर्णमाला के लेखन हेतु एक दिशात्मक चार्ट का अध्ययन अवश्य करना चाहिए क्योंकि हर भाषा के वर्णों  के लेखन में एक विशेष /निश्चित तरीका होता है हमें उसी के अनुसार लेखन का अभ्यास करना चाहिए। 

५ शांत होकर ही लेखन कार्य करने से सुंदरता झलकती है।  अतः लिखना करने से पहले अपने आपको शांत कर लेना चाहिए।  इसके लिए एक गिलास पानी पी सकते हैं। जल्दबाजी में  नहीं लिखना। 

६  कभी कभी किसी विशेष कलम से हमारे हाथ से अच्छी राइटिंग आने लगती है अतः हमें उसी से ज्यादा अभ्यास करना चाहिए। 

THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER LAZY DOG.
(उपरोक्त वाक्य में अंग्रेजी के सभी 26 अक्षर आते हैं । अत: जब भी इनकी लिखाई करें तो इस वाक्य से कर सकते हैं जिससे सभी अक्षरों की अच्छे से पुनरावृति की जा सकती है )

८   FIVE BOXING WIZARDS JUMPS QUICKLY

९ समान  आकार के अक्षर बनाए। एक समानता अच्छी राइटिंग का गुण  है। 

१०. संभव हो तो SLATE या  तख्ती का प्रयोग करें। (पेपर की बचत पर्यावरण में सहयोग )

११  एक अनुच्छेद लिखें तथा उसकी गलतियों की ढूंढ कर उनकी सही प्रकार से एक पेज की प्रैक्टिस करें। 

१२ ज्यादा  दबाव के साथ (दबाकर ) नहीं लिखें। एक  कलाकार की भांति हल्के हाथ से लेखन की कोशिश करनी चाहिए।

१३ अलग अलग स्टाइल या FONT  को  जरूर देखते रहना चाहिए। 

१४ कैलीग्राफी स्टाइल का भी समय समय पर अभ्यास कर लेना चाहिए। 
अच्छी हैंड राइटिंग आपके व्यक्तित्व में एक विश्वास पैदा करती है और व्यक्ति काफ़ी कॉन्फ़िडेंट लगता है ।


सतीश कुमार
(अध्यापक )



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टिप्पणियाँ

  1. यह कथन बिल्कुल सत्य है कि कभी कभी हमारे पास बहुत सुंदर और रोचक विचार होते हैं लेकिन हमारी लेखन शैली खराब होने के कारण हम लिखने से कतराते हैं अतः हमें इस विषय पर ध्यान देना चाहिए । भविष्य में लेखन विशेषज्ञ के रूप में अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं । सुंदर ज्ञान के साथ सुंदर लेखन कला का होना भी आवश्यक है । तभी तो हमारे गुरुजी एक पृष्ठ सुलेख करवाते थे ।

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