आज़ादी - वास्तविकता
आज़ादी - वास्तविकता
आज आजादी की पूर्व संध्या पर दिल्ली जैसे शहर में ध्वजारोहण करके कुछ विद्वान् साथियों, जिसमे विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों, जातियों और वर्गों के लोग थे, उनके स्टेज पर दिए गए सम्बोधनों को सुनते हुए कई बातें मन मस्तिष्क में गूंज रही हैं। गुलामी का अनुभव करने वाले को ही आजादी का अनुभव होगा ये सत्य है। आज की पीढ़ी में आजादी से पहले जन्म लेने वाले कुछ ही लोग बचे हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई देखी है या गुलामी का अनुभव किया है। अपने देश में अपना झंडा उठाने तक की आजादी उस समय कितनी पीड़ादायक रही होगी ये अनुभव आज ध्वजारोहण करते हुए महसूस नहीं हो पाता है। फिर भी अपनी आने वाली पीढ़ियों को इस बात का एहसास करने की कोशिश जारी हैजारी रहेगी कि हमारे देश के कितने वीर सपूतों ने इस दिन के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज उसी बलिदान को याद करते हुए हम अपने देश का तिरंगा ऊँचा करके बड़ी शान से भारत माता की जय और जय हिन्द का नारा बुलंद करते हैं।
आज देश कई मोर्चों पर लड़ रहा है देश के बाहर पडोसी दुश्मन देशों से और अंदर कोरोना जैसी महामारी साथ में उस से भी भयंकर जातिवाद, सांप्रदायिकता , देश को तोड़ने की कोशिश में लगी अलग विचारधाराओं से लड़ रहा है। इन विचारधाराओं का प्रभाव हमारे मन मस्तिष्क पर अतिभयंकर रूप में परिलक्षित होता है। ये देश विरोधी विचारधाराएं अंदरूनी दीमक की तरह हमारे देश की एकता और अखंडता को नष्ट कर रही है। भाई भाई की तरह रहने वाले अलग अलग संप्रदाय के लोग आज एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहें हैं। अंग्रेजों से आजादी मिलने से पहले सभी भारतीय थे लेकिन जैसे ही आजादी मिली सभी में कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई सवर्ण कोई दलित कोई मजदूर कोई पूंजीपति हो गए।
बड़ी आन बान शान से तिरंगा फहराते हुए उन अलग अलग लोगों के सम्बोधनों को सुनकर मन को कुछ बातें कचोटने लगी। क्योंकि सभी के सम्बोधन में उनके विचारों का ताना बाना उनके समुदाय विशेष के इर्द गिर्द ही घूमता हुआ लगा। लगा जैसे लोग अंग्रेजों को भूल चुके हैं। या यूँ कहूं की अंग्रेजों की हुकूमत उन्हें आज की हुकूमत से बेहतर लगती है। आजादी के जश्न में जैसे लोग अपने अपने समाज का आह्वाहन कर रहे हैं कि मत भूलो की अतीत में क्या क्या घटा है। लेकिन हँसी आई की उन अंग्रेजों को भूल गए जिनको भागने के लिए हमारे पूर्वजों ने सीने पर गोलियां खाई। ठीक है इतिहास याद रखने के लिए होता है की अतीत में क्या गलतियां हुई लेकिन साथ ही साथ ये भी इतिहास कहता है की सुधार कैसे करना है सीख लो। अब भी पढ़लिखकर भी नहीं सीखोगे तो कभी नहीं सीखोगे।
मानसिक गुलामी से आजादी कब मिलेगी कहा नहीं जा सकता है। मानसिकता का इलाज आवश्यक है। मुझे लगता था कि ओछी सोच और मानसिकता का इलाज उच्च शिक्षा है पढाई के द्वारा हम शायद उस मानसिकता से आजाद हों सकें जिस ढोते ढोते हमारी पीढ़ियां गुजर गई लेकिन मेरी ये सोच भी आज धूमिल हो गई क्योंकि जो स्टेज पर सम्बोधन करने वाले लोग थे कोई भी परास्नातक से काम नहीं था। जब एक पोस्ट ग्रेजुएट तक शिक्षित व्यक्ति निम्न स्तर की मानसिकता से अछूता नहीं है तो मैं अपने देश के सबसे निचले तबके जो आर्थिक शैक्षणिक स्तर पर काफी कमजोर है कि कोई कमी नहीं बता सकता हूँ की उसकी सोच क्या होगी।
आज देश में एक सविंधान है जो सभी के लिए एक सामान है,लोकतंत्र है, अभिव्यक्ति की आजादी है, अवसरों की समानता है अपने आप में सशक्त देश की सभी खूबियां लिए हुए देश में हम अपना ध्वजारोहण कर रहे हैं। क्या ये सभी बातें हमारी पूर्ण आजादी के घोतक हैं। ये सभी बातें देखने में सुनने में तो आजादी की घोतक ही लगती हैं लेकिन आज हमें आजादी चाहिए उस सोच से जो देश को तोड़ने की बात करता है। चाहे वो किसी भी जाति , धर्म, वर्ण, सम्पदाय कोई भी अमीर गरीब दलित मजदूर किसान सैनिक कोई भी हो जो भी भेदभाव या तोड़ने की बात करता है उस सोच को दूर करना है। हर चुनौती से पार पाना ही होगा हमें अपनी भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए।

India is a great country
जवाब देंहटाएंआज के इस भौतिकवादी युग में हर कोई अपनी सुख सुविधा पूर्ति में लगा हुआ है आम आदमी से लेकर के राजनेताओं उद्योगपतियों बुद्धिजीवियों तक सभी लोग अपने अपने भाई भतीजे वाद की दृष्टिकोण से अपना विकास करने में लगे हुए हैंl आम जनता का ख्याल लोगों से उम्मीद करना बेईमानी है इसीलिए नियम कानून रोज बनते हैं नए-नए और केवल आम जनता सीधे साधे लोगों के लिए होते हैं बड़े लोग तो ऐसे कानून को अपनी जेब में रख कर चलते हैं l यह वही लोग होते हैं जो विदेश में जाते हैं तो हाथ के नियम कानून का शत-प्रतिशत पालन करते हैं और अपने देश की धरती पर पैर रखते ही सारे कानून कायदे भूल जाते हैं l बिकाऊ मीडिया, दलाल नेता ,संकीर्ण मानसिकता के लोग यह सभी हमारे देश की एकता अखंडता के लिए बहुत ही घातक हैं जोकि कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है क्रोना वायरस केवल जिसको होगा वही मरेगा l लेकिन यह अपने वाड़ी के जहर से देश को खोखला कर देंगे देश का एक एक तिनका बेच करके अपना पेट भरने में लगे हैं l पता नहीं ऐसे लोगों कारपेट कब भरेगा और कितने पैसे रुपए से भरेगा यह नहीं मालूम l इस 74th स्वतंत्रता दिवस पर हमें अपने उन महान क्रांतिकारियों देशभक्तों और उन नेताओं को याद करना चाहिए जिनकी मेहनत से जिनके परिश्रम से हमको यह आजादी मिली है l हमें अपनी इस आजादी को बनाए रखना है सहेज कर रखना है जिससे विदेशी ताकत या देश की सांप्रदायिक ताकतें इसको हमसे छीन न सके और हमारी आजादी को तोड़ ना सके l आने वाली पीढ़ी को इस बात से हमें अवगत कराते रहना है कि यह देश हमारे बहुत से महापुरुषों की कुर्बानियों से आजाद हुआ है और हमें उनके लोगों को बर्बाद नहीं होने देना चाहिएl अगर हम फिर से विदेशी लोगों को यहां पर व्यापार करने के लिए छूट देते हैं और कंपनियों को अपने हिसाब से नियम कानून बनाने देते हैं तो फिर हमारे देश को गुलाम होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा क्योंकि एक बार हमारे देश के इतिहास में ऐसा हो चुका है अंग्रेज व्यापार करने ही भारत आए थे और व्यापार करते-करते यहां के शासक बन गए इसलिए हमें इस बात से सचेत रहना होगा कि विदेशी कंपनियों को यहां पर भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल नियम कानून बनाकर ही काम करने के लिए कहा जाए और उन पर कड़े प्रतिबंध भी होना चाहिए अपनी मनमानी से कुछ ना कर सके l
जवाब देंहटाएंbat aapki ekdam sahi hai
हटाएंआज जनमानस में देश के प्रति कर्तव्यबोध की तुलना में अधिकार बोध अधिक है और इस कारण से राष्ट्रीयता की भावना का क्षरण हो रहा है. मुफ्तखोरी को हम सबने आत्मसात कर लिया है.
जवाब देंहटाएंYes
जवाब देंहटाएं