हमारी सांस्कृतिक धरोधरों को संजोने का व्हाट एन आइडिया सरजी

 हमारी सांस्कृतिक धरोधरों
 को संजोने का व्हाट एन आइडिया  सरजी 

'' व्हाट एन आइडिया सरजी '' कुछ सालों पहले एक विज्ञापन में सुनाई देने वाला वाक्य '' व्हाट एन आइडिया सरजी '' कई लोगों के जीवन में एक नई कहानी लिख गया। आज के कई नामचीन प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में हम उन लोगों को  देखते हैं जिन्हें उनके किसी न किसी यूनीक आईडिया ने जीवन को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। मेरे मन में भी एक आईडिया आया की आज देश के हर कोने में छोटी से छोटी दुकान पर ई वॉलेट मिल जायेगा।  मोहल्ले की सबसे छोटी दुकान किराना पनवाड़ी चाय रेहड़ीवाला सब्जीवाला हर किसी के पास  वॉलेट मौजूद है चाहे वो PAYTM , GOOGLE PAY, PHONE PE, AIRTEL कोई सा न कोई सा इ वॉलेट अवश्य मिल जाएगा। 
क्या  देश की विभिन्न सांस्कृतिक धरोहरों को नहीं ढूंढा जा सकता है।  देश की अपेक्षित धरोहरों को सवांरने के लिए इसी प्रकार का कोई न कोई प्लेटफार्म सरकार  को तैयार करवाना चाहिए जहाँ हर किसी की पहुँच हो जहाँ वह इ वॉलेट के जैसे धरोहर का रजिस्ट्रेशन करा सके।  फोटो अपलोड कर सके।  उस धरोहर से सम्बंधित कोई विशेष सुचना या विशेष सामग्री हो तो उसे अपलोड कर सके। जब आज के सोशल मीडिया के समय में एक छोटी सी रेहड़ी पटरीवाले तक इ वॉलेट की पहुँच हो सकती है तो क्यों नहीं हमारी ऐतिहासिक महत्त्व की इमारतों तक देश की पहुँच नहीं हो सकती।  हो सकती है जरुरत है तो  केवल काम करने के तरीकों बदलाव की। आज एक फिल्म का ट्रेलर जारी होते ही करोडो व्यू कुछ घंटों में मिल  जातें हैं लेकिन पूरे देश में ५ प्रतिशत लोग नहीं मिलेंगे जिन्हे देश की ५० ऐतिहासिक महत्त्व की जगहों का पता होगा। सरकार को पारम्परिक नीतियों में कुछ बदलाव करने चाहियें। जैसे गूगल पे या पे टी ऍम हर कोने में पहुँच बना सकता है तो मात्र एक ऍप के लॉच से भी पूरे भारत की समस्त सांस्कृतिक धरोहरों की लिस्टिंग की जा सकती है।  गुमनाम या समय की धुल से ढकी इमारतों स्थलों का भी पता चल सकता है। लिस्टिंग के बाद पुरातात्विक विभाग की टीम उसकी जाँच पड़ताल करके अप्रूवल दे सकती है।  उस से सम्बंधित लोकल जानकारियां ,सम्बंधित मान्यताएं ,लोककथाएं या किवदंतियां, सम्बंधित व्यक्ति की जानकारियां या कोई उस से सम्बंधित सामग्री की फोटो  पोस्ट की जा सकती हैं ऑनलाइन ही सबमिट की जा सकती हैं (पब्लिश करने के लिए विभाग अधिकारों को अपने नियंत्रण में रख सकता है जिससे को अवांछित देश की गरिमा को नुकसान न पहुंचा पाए। लोकल प्राचीन इमारतों की फोटोज को अपलोड करने के लिए जिओ मैप की हेल्प ली जा सकती है लाइव फोटो अपलोड का ऑप्शन रख सकते हैं जिस से उस जगह की लोकेशन ट्रेस हो सके।  फोटो डालने वाले का आधार कार्ड डिटेल लिए जा सकते हैं (authenticity) के लिए और उसे प्रोत्साहन स्वरूप कॅश बैक , प्रशंसा पत्र , किसी टूरिस्ट प्लेस पर जाने का फ्री पास दिए जा सकता है  या अन्य कोई और जिस से लिस्टिंग करने को बढ़ावा मिल सके। 
लिस्टिंग की अप्रूवल के बाद सबसे महत्वपूर्ण है वहां लोगों का आवागमन बढ़ाना इसके लिए सरकार को पी पी पी  मॉडल  अपनाना चाहिए जिस से क्षेत्र में विभिन्न सेवाओं का विकास  सके।  जैसे होटल ढाबा ट्रेवल सुविधा एटीएम वहां लोकल बाजार आदि का विकास सुनिश्चित किया जा सके। इसमें वहीँ के लोकल लोगों की बढ़ावा ज्यादा देना चाहिए। आवागमन सुनिश्चित करने के लिए सरकार अपनी LTC और टूर अर्रेंजमेंट में छोटे या गुमनाम उपेक्षित क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दे। टूर एजेंसीज को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए किसी न किसी रूप में। टूर हर वर्ष रोटेशन पद्धति  पर होना चाहिए जिस से सभी क्षेत्रों को महत्त्व मिल सके। 
इस से रोजगार लोकल पहुँच में पहुंचेगा। लोकल मार्किट का उत्थान होगा। 

यदि आप मेरी website पर जाना चाहते है तो यहाँ क्लिक करें 🙏



अप्डेट पाने के लिए पेज follow अवश्य करें 🙏

टिप्पणियाँ

  1. सरकार को जरूर ऐसा करना चाहिए जिससे हमारी ऐतिहासिक धरोहर के बारे में हमारी इस पीढ़ी को समय समय पर सूचना जानकारी मिलती रहे l

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

निराशा नहीं, एक और मौका: NIOS से नई शुरुआत

नशा और नशाखोरी – छात्र जीवन से समाज तक एक खामोश संकट

शिक्षा में एनआईओएस की भूमिका