भारत में बेरोज़गारी का मूल कारण
भारत में बेरोज़गारी का मूल कारण
एक सोच जो भारतीय मन मस्तिष्क में आमतौर पर देखने में आती है कि पढ़ाई समाप्त करने के बाद जब एक बच्चा आर्थिक तौर पर कुछ करना चाहता है तो सबसे पहला विकल्प उसे नौकरी ही नज़र आता है । क्योंकि ये एक ऐसा विकल्प होता है जिसमें उसे ज़्यादा कुछ रिस्क / जोखिम नहीं उठाना होता ।बस 30 दिन पूरे ओर सैलरी हाथ में । ये उन्हें आय का सबसे आसान ओर सुरक्षित विकल्प दिखाई पड़ता है । जब सभी को नौकरी चाहिए तो बेरोज़गारी की दर बढ़ना स्वाभाविक है ।
आम भारतीय युवा क्यों सबसे पहले अपनी आय के लिए नौकरी के विकल्प को चुनता है इसके लिए कई कारण ज़िम्मेवार हैं । हमारी शिक्षण नीति , पहले से ही ग़रीबी की उच्च दर , कौशल , जोखिम उठाने का डर , पारिवारिक पृष्ठभूमि आदि ।इन सबसे जूँझने के बाद एक युवा जो खोया है अपने नए नए व्यवसाय के उद्योग की उड़ान के स्वप्नों में उसे आगे कई रुकावटों का सामना करना पड़ता है । रेजिस्ट्रेशन, टैक्स सिस्टम , noc , लाइसेन्स, बिजली कनेक्शन , पानी कनेक्शन , fire safety certificate, बिल्डिंग सर्टिफ़िकेट ,एमसीडी, वन विभाग , NGT , GST , डॉक्युमेंटेशन लीगल , बैंकिंग , लोन export import ,कस्टम आदि बहुत सारी समय खाने वाली जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है । उसके बाद उसकी फ़ैक्टरी में पहली यूनिट का उत्पादन सम्भव होता है । इन सबके लिए कितने पापड़ बेलने पडते हैं कि नानी याद आ जाती है । भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं की इनसे लड़ते लड़ते एक सुंदर सपने में खोए भावी युवा व्यवसायी की सारी इच्छाएँ दम तोड़ देती हैं । उसे विकल्प नज़र आता है नौकरी । या विदेश से ऑनलाइन सस्ता माल मंगाकर मार्जिन पर यहाँ बेचना ।यहाँ हर कोई ख़रीदने बेचने में लगा हुआ है हर गली में दो चार दो चार डीलर मिल ही जाएँगे । चाहे प्रॉपर्टी के हो या अन्य किसी सामान के ।
पिछले कुछ वर्षों में ईज़ ओफ़ डूइंग पर काफ़ी काम हुआ है ।बावजूद इसके अभी भी विदेशी या देशी कोई भी व्यावसायिक गतिविधियों को स्थापित करने से डरता है ।
पिछले कुछ समय में भारत चाइना विवाद के बाद से ही चाइना उत्पाद के बायकोट की भावना प्रबलता से हर भारतीय मन मस्तिष्क में उबाले ले रही है ।होना भी लाज़िमी है । कोरोना से लगे लाक्डाउन ने अर्थव्यवस्था को और भी पीछे धकेल दिया है । करोड़ों लोगों का काम धंधा लगभग ठप्प सा हो गया है एक्के दुक्के क्षेत्रों को छोड़कर । भारत सरकार अपनी पूरी कोशिशों में लगी है इस संकट से उभरने में । एक के बाद एक आर्थिक पैकिज की घोषणा की गई । अन्लाक १,२,३ किए गए ।
अब सवाल ये कि चाइना प्रोडक्ट का बहिष्कार तो हम कर रहे हैं लेकिन क्या उतना सस्ता माल हम खुद तैयार करने में सक्षम हैं ? क्या टेक्नॉलजी के क्षेत्र में भी माल तैयार करने में सक्षम हैं ? हमारी निर्भरता चाइना उत्पाद पर कितनी पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है ये भी एक विषय है । भारत ओर चाइना विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में सबसे ऊपर के दो देश हैं । उत्पाद के खपत के लिए भारत को एक विकल्प के तौर पर देखा जाता रहा है ।चाइना प्रोडक्ट पर निर्भरता ख़त्म करने के लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता निकाला गया। वास्तव में ये एक तीर से कई निशाने लगाने जैसा है । इस से चीन पर निर्भरता ख़त्म होगी । अपने यहाँ बेरोज़गारी को विराम मिलेगा । भारतीय उत्पाद को बढ़ावा मिलेगा ।अर्थव्यवस्था को भी उछाल मिलेगा ।लेकिन कब ? कैसे ? ये सवाल संदेह पैदा करते हैं ।
एक मित्र से बातचीत करते हुए एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि हम उत्पादन करने से ज़्यादा उत्पादन बेचने में ज़्यादा सहज है ।एक अर्थव्यवस्था के लिए ये सोच विकास में बाधक है इस से दूसरे देशों पर हमारे देश की निर्भरता बढ़ेगी ।एक ही गाँव में हर घर में परचून की दुकान खोल लेने से गाँव की खपत नहीं बढ़ेगी or ना ही विकास बल्कि उस क्षेत्र का पैसा उत्पादक गाँव में जाने लगेगा ।भारतीय अभी तक या तो विदेशी माल माँगा रहे थे या विदेश से पार्ट्स माँगा कर यहाँ असेम्बल कर रहे थे ।बहुत सारी इ-कॉमर्स कम्पनियाँ विदेशी उत्पाद को भारतीय बाज़ार में धड़ल्ले से बेच रहे थे क्योंकि वो सस्ते पड़ते थे ।ओर यही से ये कंपनिया फल फूल रहीं थी ।
आज आवश्यकता युवाओं की मानसिकता में बदलाव की है इसके लिए भारत सरकार की कौशल विकास योजना ओर दिल्ली सरकार की EMC जैसी योजनाएँ काफ़ी सहायक सिद्ध हो सकती हैं । msme स्थापित करने के लिए इन्हें सिंगल विंडो प्लैट्फ़ोर्म प्रदान किया जाना चाहिए । जहां एक बार के रेजिस्ट्रेशन से ही एक व्यवसायी बनने की चाह रखने वाले युवा को gst, electricity , अग्निशमन , वन विभाग , एमसीडी pwd आदि से स्वयं मदद का हाथ आगे आए। कितना अच्छा लगे कि आपने केवल एक रेजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म भरा ओर बिजली वाले आपसे स्वयं पूछें की कब कहाँ कितने वाट का कनेक्शन चाहिए । MCD , PWD , वन विभाग , NGT द्वारा दिए गए पते पर खुद विज़िट करके NOCदी जाए । बैंक से लोन रेक्वायअर्मेंट assessment की जाएँ ।मार्केटिंग प्लैट्फ़ॉर्म ।ओर अलग अलग सुविधाएँ आपको हाथ बढ़ाते ही मिल जाएँ ।
शायद कई युवा जो कोई अम्बानी या अड़ानी बन सकता था कुछ करने से पहले ही उसकी इच्छाएँ दम तोड़ती नज़र आती हैं और वह किसी फ़ैक्टरी में नौकरी करता हुआ ।आत्मनिर्भर भारत के लिए इन रुकावटों का दूर होना अतिआवश्यक है ।
सतीश कुमार
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गुरुदेव! आपके द्वारा प्रकाशित ब्लॉग "भारत में बेरोजगारी का मूल कारण" पढ़ा इसमें आपने जो सुझाव दिए हैं वो भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं यदि इनको चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए तो । अब समय की मांग है कि हमें हमारी जीवनशैली, कार्यशैली, शिक्षणशैली, व्यवहारशैली में परिवर्तन करना चाहिए । इस अंक को लिखने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद आप ऐसे है नवीनतम मुद्दों से हमें परिचित करवाते रहें । धन्यवाद
जवाब देंहटाएंthank you dear and try to follow your suggestion in future
हटाएंअति उत्तम पथप्रदर्शन👍
जवाब देंहटाएंdhanywad
हटाएंसर,
जवाब देंहटाएंअत्यंत महत्वपूर्ण बात कही आपने,,,
श्रेष्ठ प्रस्तुती
thanks dear
हटाएंYou have highlighted very crucial issues pertaining in the economy.
जवाब देंहटाएंKindly enlightened us in the near future as well sir..����
sure sir , its my pleasure to work for my dear
हटाएंसर यह बात महत्वपूर्ण है कि आपने जो बेरोजगारी के कारण बताए हैं अपने आप के काफी मायने रखते हैं जब तक सरकार युवाओं के लिए कुछ ठोस कदम नहीं उठाएगी और हमारे ढांचागत शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं करेगी तब तक बेरोजगारी ऐसे ही बढ़ती रहेगी क्योंकि आज के समय में शिक्षा केवल डिग्री बांटने तक सीमित रह गई हैl प्रोफेशनल कोर्स चलाने वाली सरकार को छात्र के प्लेसमेंट बारे में भी सोचना चाहिए जिससे छात्रों को कोर्स करने के बाद बेरोजगार ना होना पड़े l
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