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भारत का दुनिया में बढ़ता दबदबा

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भारत का दुनिया में बढ़ता दबदबा: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसकी अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति ने दुनिया में इसके दबदबे को बढ़ाया है। *कारण:* 1. *आर्थिक विकास*: भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, जिससे इसकी आर्थिक शक्ति बढ़ रही है। 2. *राजनीतिक स्थिरता*: भारत में राजनीतिक स्थिरता है, जिससे इसकी राजनीतिक शक्ति बढ़ रही है। 3. *सैन्य शक्ति*: भारत की सैन्य शक्ति बढ़ रही है, जिससे इसकी रक्षा क्षमता बढ़ रही है। 4. *विज्ञान और प्रौद्योगिकी*: भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है, जिससे इसकी आर्थिक और राजनीतिक शक्ति बढ़ रही है। 5. *अंतर्राष्ट्रीय संबंध*: भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंध मजबूत हो रहे हैं, जिससे इसकी राजनीतिक और आर्थिक शक्ति बढ़ रही है। *प्रभाव:* 1. *वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान*: भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को बढ़ा रही है। 2. *राजनीतिक प्रभाव*: भारत की बढ़ती राजनीतिक शक्ति इसके राजनीतिक प्रभाव को बढ़ा रही है। 3....

LOST IN DARKSIDE OF ONLINE GAMING

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11 साल के बच्चे के शब्द अत्यधिक गेम खेलने पर !!! {यहाँ एक विशेष व्याख्या है कि गेम बच्चों के दिमाग पर कैसे हावी हो जाते हैं! 😧 -> सबसे पहले जब वे इसे खेलना शुरू करते हैं, तो वे रैंक पुशिंग के बारे में नोटिस करना शुरू करते हैं। -> फिर वे धीरे-धीरे घंटों तक इसे खेलना शुरू कर देते हैं। -> फिर वे पढ़ाई को अनदेखा कर देते हैं और जब कोई पढ़ने के लिए कहता है तो रोने लगते हैं। } Words of a child 11 years old on playing excessive games !!! { Here's a exclusive explanation how games takes over children's minds !😧   -> First when they starts playing it, they starts to notice about rank pushing. -> Then they slowly - slowly starts to play it for hours and hours. -> Then they ignores study and cries when someone ask for studying.} Now lets talk about how to reduce  there screen time.⌚ First make a timetable on the phone usage.  Apply the children's lock on the game that they plays as it'll reduce the screen time.🔒 Then just become a little strict towards your chi...

मेरा सवा शेर भारत

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मेरा सवा शेर भारत   कुछ लोगों का कहना है की इस सरकार ने ये बीच दिया वो बेच दिया । एक साथी ने कहा की इस सरकार ने देश को चवन्नी के भाव बेच दिया है । तो ऐसे सभी चवन्नी छाप लोगों  को मेरा जवाब है कि ये चवन्नी अब एक रुपये में लग कर सवाया हो चुकी है । जिसे विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की जीडीपी की तेज़ी से समझा जा सकता है । दुनिया के बड़े बड़े शेर कहे जाने वाले देशों के आगे सवा शेर भारत खड़ा है । जिसके राष्ट्रीय चिन्ह में भी शेर है ।आज विश्व की सबसे तेज प्रगतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है भारत की अर्थव्यवस्था । विश्व का हर बड़ा देश भारत में निवेश करने के लिए उत्सुक दिखाई पड़ता है । दुनिया को आज विश्व गुरु के साथ साथ विश्व नेतृत्व की क्षमता भी भारत में नज़र आने लगी है । भारत इस प्रकार अपनी कूटनीति आगे बढ़ा रहा है कि दो परस्पर दुश्मन देशों को एक ही मंच पर लाने की क्षमता दुनिया को भारत में दिखने लगी है । युद्ध रोकने की कूटनीति भी भारत में दिख रही है । ये विश्वास कमाना एक बड़ी जीत है ।ये आज के नेतृत्व द्वारा विश्व में भारत के प्रति पैदा किए गये विश्वास के कारण ही ये संभव हो पाया है...

पाती

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प्यारे बच्चों  आशा है आप और आपके परिवार में सभी स्वस्थ होंगे । इस महामारी ने पूरी मानव जाति के जीवन में उठा पटक मचाई है । सभी का जीवन प्रभावित हुआ है । इसके प्रभाव में आपका शैक्षिक जीवन भी आया है । लेकिन आप एक योद्धा की भाँति इस प्रभाव को सीमित कर सकते हैं । आपको केवल अपनी कक्षाओं में उपस्थित रहकर अध्यापकों के दिशा निर्देशों को मानकर  अपना जीवन संवारना है । शिक्षा ही एकमात्र हथियार है जो आपके जीवन में महामारी के प्रभाव को समाप्त करके आपको उच्च स्थान पर पहुँचा सकता है । आज आपके पास मौक़ा है पढ़ने का तो उसे मत खोना । क्योंकि ये मौक़ा बार बार नहीं मिलता । अपने आपको देखो और अपने परिवार को देखो फिर अपने सपनो को जिन्हें आप अपने मन में दृढ़ संकल्प लेकर ही पूरा कर सकते हैं । आज आपके कक्षा अध्यापक आपके पास न है लेकिन ऑनलाइन माध्यम से आपके पास आपके सारे अध्यापक उपलब्ध हैं । तो आप अपना संकल्प याद करो और अपने पास उपस्थित संसाधनों का प्रयोग करके अपनी शिक्षा पूर्ण कीजिए  । यही शिक्षा ही आपको पूरे जीवन में याद रहेगी ।  आपका कक्षाध्यापक  सतीश कुमार

DSSSB कंपीटिशन की तैयारी

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जानिए बार  बार परीक्षा देने पर  भी क्यों सफलता हाथ नहीं लगती है ? अक्सर युवाओं को सरकारी नौकरी के सपने देखते हुए देखा जाता है । लेकिन कितने युवा है जो अपने इस सपने को पूरा कर पाते हैं । कितने ही  युवाओं को तो सरकारी नौकरी कब कहाँ कैसे निकलेंगी ये भी नहीं पता होता है ।और पता भी चल जाए तो तैयारी कैसे करनी है कब करनी है कितनी करनी है कौन कौन सी बुक पढ़नी है कहाँ से मिलेगी नोट्स के लिए किस से कांटैक्ट करना है आदि सवाल मन में रहते हैं । इन सब के अलावा अक्सर बच्चे इस बात से भी ग्रस्त देखे गए हैं की ‘हमें सब पता है’ का टैग लगाकर घूमते हैं लेकिन जब परीक्षा का परिणाम निकलता है तो निल बटे सन्नाटा रह जाता है । फिर शुरू होता है खिसियानी बिल्ली खम्भा नौचे और नाच ना जाने आँगन टेढ़ा वाला खेल मतलब बहाने तलाशना कि किस के ऊपर परीक्षा में सफल ना होने का ठीकरा फोड़ा जाए । लेकिन सब कुछ करने के बाद भी हम अपनी कमियों को समझने का प्रयास नहीं करते और ना अपने आपको अपग्रेड करते हैं ।ज़रूरत है अपने आपको जज करने की कहाँ कमी रह जाती है जो बार बार परीक्षा देने के बाद भी सफलता हाथ न लगती है । परीक्षा पा...

5 सितंबर शिक्षक दिवस पर विशेष ( प्रलय और निर्माण अध्यापक की गोद में )

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" गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम: "  अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं। गुरु शब्द अपने आप में एक सम्मान है ।बाकी सभी सम्मान तो इस सम्मान की पुनरावृति मात्र हैं ।गुरु शब्द अपने आप में इतना विस्तृत भाव अपने अंदर समेटे हैं कि बाकी सभी सम्मान इसके सामने नगण्य दिखाई देते हैं ।गुरु का अर्थ होता है बड़ा एवं विपरीत होता है लघु अर्थात छोटा I अर्थात गुरु शब्द गुरु और शिष्य दोनों में अपने आप में एक पद है और यह सब पद के अनुसार ही बने हुए हैं । रही बात सम्मान की तो वास्तविक सम्मान तो एक अध्यापक को विद्यार्थियों द्वारा विद्यार्थी जीवन के उपरांत दिया जाने वाला सम्मान है । जब एक विद्यार्थी कहीं सफल होता है और अपने अध्यापक को याद करके उसे सम्मान देता है वही एक शिक्षक का वास्तविक सम्मान होता है । गुरु अर्थात शिक्षक और 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस । हम प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं गुरु की महत्ता को ब...

हमारे स्कूलों से नौकरी ढूँढने वाले बच्चे ही क्यों निकलते हैं ?

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  हमारे स्कूलों से नौकरी ढूँढने वाले बच्चे ही क्यों निकलते हैं ? अत्यंत हर्ष का विषय है कि दिल्ली की शिक्षा क्रांति एवं दिल्ली शिक्षा प्रारूप  की चर्चा सर्वत्र है दिल्ली के छात्रों का प्रदर्शन मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों पक्षों में सराहनीय है।आज जो यहाँ के छात्र शिक्षा के क्षेत्र में नए नए आयाम गढ़ रहे हैं उसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री माननीय श्री मनीष सिसोदिया जी के सफल निर्देशन में अध्यापकों की अथक मेहनत का विशेष योगदान है दिल्ली के सरकारी विद्यालयों के छात्र आज प्राइवेट स्कूलों के छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं यह सब विगत वर्षों में दिल्ली की शिक्षा प्रणाली में किए गए बदलावों का परिणाम है कि आज दिल्ली के छात्रों के लिए ढांचागत सुविधाओं में किया गया बदलाव एवं अध्यापकों में प्रेरणा हेतु विभिन्न प्रशिक्षण जो देश विदेश में कराए गए इसके परिणाम सभी के सामने है। बहुत सारी अच्छी अच्छी बातों के साथ साथ एक यक्ष प्रश्न यह भी है कि दिल्ली के सरकारी विद्यालयों के छात्र केवल नौकरी तलाशने वाले छात्र ही क्यों रहे जाते हैं। प्राचीन प्रारूप में शिक्षा का उद्देश्य जीव...

सकारात्मकता

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जब आप समस्याओं के बारे में सोचते हैं तो आप अपने आपको केवल समस्याओं से घिरा पाते हैं परंतु समस्या के समाधान के बारे में सोचते ही आपको अवसर ही अवसर नज़र आने लगते हैं ।  उपरोक्त वाक्य सिर्फ़ वाक्य नहीं हैं जीवन में महसूस की जाने वाली सच्चाई का आईना है । स्वयं आज़मा कर देखिए दो मिनट केवल आज़माने में लगाइए और अवसरों का लाभ उठाइए ।  सकारात्मकता एक ऐसी मानसिक अवस्था है जिसमें व्यक्ति जीवन के प्रति आशावादी और उत्साही रहता है। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है। सकारात्मकता के फायदे: 1. तनाव कम होता है: सकारात्मकता तनाव को कम करने में मदद करती है। 2. आत्मविश्वास बढ़ता है: सकारात्मकता आत्मविश्वास को बढ़ाती है। 3. संबंधों में सुधार होता है: सकारात्मकता संबंधों में सुधार लाती है। 4. स्वास्थ्य में सुधार होता है: सकारात्मकता स्वास्थ्य में सुधार लाती है। 5. जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है: सकारात्मकता जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाती है। सकारात्मकता को बढ़ाने के तरीके: 1. ध्यान: ध्यान करने ...

कोरोना के बाद विद्यालय प्रवेश

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प्रिय छात्रों ,  अति हर्ष का विषय है कि कठिन समय के दौर को पार करके हम फिर से विद्यालय में उपस्थित होने जा रहे हैं । लेकिन अपने लाल को विद्यालय भेजते हुए आज भी आपके अभिभावकों के दिमाग़ में आपकी सुरक्षा को लेकर भय है कि मेरा लाल आज घर वापस आकर बीमार तो नहीं लग रहा है । आपकी सुरक्षा की चिंता आपके अभिभावकों की तरह अध्यापकों को भी है ।  आपकी छोटी छोटी आदतों के सुधार से ये चिन्ताएँ कम हो सकती हैं । आपसे अपेक्षा है कि आप विद्यालय में नए परिवेश में नये दिशा निर्देशों को भली प्रकार से मानेंगे एवं स्वयं को और अपने दोस्तों को सुरक्षित रखेंगे । विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व कोरोना बीमारी ने बढ़ा दिया है ।  अनुशासन के लिए कुछ सामान्य दिशा निर्देश निम्न प्रकार से हैं । विद्यालय प्रवेश करते समय थर्मल स्क्रीनिंग में अवश्य हिस्सा लें।जिससे आपके शरीर का तापमान नियमित रूप से जाँचा जा सके । मास्क अवश्य पहनें ।लापरवाही ना करें । 2 गज दूरी मास्क है जरूरी के नियम को अवश्य माने  यदि हो सके तो अपना खुद का सेनीटाईज़र साथ रखें । भीड़ का हिस्सा ना बनें । कोई प्रार्थना सभा या क्रियाकलाप ...

जीवन - एक परीक्षा ।

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 मनुष्य के लिये जिन्दगी अपने आप मे एक बहुत बड़ी  परीक्षा है जिसमें उसे जीवन के अनेक पड़ावों पर बहुत सारी परीक्षाएं देनी पडती हैं। जो इन  परीक्षाओं में सफल वही कामयाबियों के शिखर पर होता है। आग लगने पर कुआं खोदने की कहावत तो आपने सुनी ही  होगी कि किस प्रकार हम जब बिना तैयारी के किसी जरुरत के समय कैसे हाय तौबा  मचाते हैं और परेशान होतें हैं। जीवन मे किसी भी परीक्षा की घड़ी में  धैर्य और बुद्धि ही सबसे बडे  हथियार हैं। लेकिन ये भी बिना पूर्व तैयारी के समय पर साथ छोड सकते हैं। जिस प्रकार युध से पूर्व एक योद्धा अपने हथियारों को पैना करता है उसी प्रकार से हमे भी अपनी तैयारियां पहले से ही पूरी कर के चलना चाहिए । आलस्य जीवन में सफलता प्राप्त करने में सबसे बड़ा रोड़ा है। https://satlekhani.in/ यदि आप मेरी website पर जाना चाहते है तो यहाँ क्लिक करें 🙏 https://satlekhani.in/ अप्डेट पाने के लिए पेज follow अवश्य करें 🙏

अनदेखे घाव, अनसुनी कहानियाँ

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  साहब के औचक निरीक्षण दौरे पर आने की खबर जैसे ही ऑफ़िस में पहुँची, माहौल अचानक बदल गया। अभी तक जो लोग आराम से अपनी कुर्सियों पर बैठे काम कर रहे थे, वे अब फुर्ती में आ गए। कोई फ़ाइलों की धूल झाड़ रहा है, कोई रजिस्टर ठीक कर रहा है, तो कोई पुरानी पड़ी फाइलों को नए कवर में सजा रहा है। चपरासी बार-बार एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ रहा है—“साहब ने वो फ़ाइल माँगी है… जल्दी दीजिए।” कहीं घबराहट है, कहीं जल्दबाज़ी, और कहीं दिखावे की एक अनकही कोशिश—सब कुछ एकदम व्यवस्थित दिखाने की। साहब आने वाले हैं… और साहब का मतलब है—अनुशासन, दबाव, और एक अलग ही प्रकार की ऊर्जा। सच कहें तो “साहब” शब्द सुनते ही हमारे मन में एक छवि बन जाती है—सूट-बूट पहने, तेज़ चाल से चलते हुए, कम बोलने वाले, और जिनकी एक नज़र ही बहुत कुछ कह देती है। उनका रौब ऐसा होता है कि लोग सीधे बैठ जाते हैं, आवाज़ें धीमी हो जाती हैं, और काम अचानक तेज़ हो जाता है। पर क्या कभी हमने सोचा है कि इस “रौब” के पीछे कितनी कहानियाँ छिपी होती हैं? जिस तरह एक चमकदार सूट के नीचे पुराने पैबंद छिपे होते हैं, उसी तरह एक साहब के व्यक्तित्व के पीछे संघर्ष ...

हिंदी की बिंदी

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 हिंदी से लगभग ग़ायब सी होती उसकी बिंदी 

परीक्षाओं में बच्चों द्वारा मुख्यतः की जाने वाली ग़लतियाँ

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https://satlekhani.in/  विद्यार्थी का सफल या असफ़ल होना उसकी परीक्षा देने पर निर्भर करता है। अभी तक ऐसी परीक्षा व्यवस्था नहीं की जा सकी है जो परीक्षार्थी के साथ की परिस्थितियों के आधार पर उसकी योग्यता का निर्धारण कर सके ।किसी भी छात्र की अंक पत्रिका पर उन परिस्थितियों का उल्लेख नहीं मिलता है कि उसने कैसे कैसे अपनी पढ़ाई पूरी की है ।परीक्षा भवन में उसकी मानसिक स्तिथि कैसी है केवल और केवल  उसके द्वारा लिखे गए प्रश्नोत्तर के आधार पर ही परीक्षार्थी का मूल्यांकन किया जाता है। जब मूल्यांकन लिखाई के आधार पर ही होना है तो सबसे बेहतर विकल्प है पूर्व में हुई परीक्षा में toppar रहे छात्रों की answer sheets की copy ।परीक्षा में topper रहे छात्रों की कापियाँ सभी के अध्ययन हेतु नेट पर उपलब्ध हैं । ये कापियाँ सभी के लिए मार्गदर्शन करती हैं कि किस प्रकार लिखने से परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त किए जा सकते हैं ।और अपनी कमियाँ साफ़ साफ़ आइने की तरह दिखाई देने लगती हैं । समय प्रबंधन में गलती: परीक्षा में समय प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर छात्र समय प्रबंधन में गलती कर देते हैं और परीक्षा में ...

कैसे पाएँ परीक्षा में अच्छे अंक वाली सफलता

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जैसे जैसे परीक्षाएँ नज़दीक आती जा रही हैं । विद्यार्थियों की हालत पतली होती जा रही है। अभिभावक भी अपने बच्चों के लिए चिंतित हैं । वैसे ही कोरोना ने वर्ष भर पढ़ाई से दूर रखा ।स्कूल  बंद रहे । जैसे पढ़ाई से नाता ही टूट गया । सरकार ने भी कोशिश की है कि छात्रों के लिए इस चिंता को कैसे कम करें । syllabus कम करके या ओनलाइन शिक्षण की व्यवस्था करके । दोनो करने के बाद भी अभिभावकों और छात्रों दोनों की परेशानियाँ कम नहीं हो पा रही है।  कठिनाइयाँ व परिस्थितियाँ कैसी भी रहीं हों आज के समय की गलाकाट प्रतियोगिता में आगे रहने वाला ही सफल माना जाता है। अंकपत्रिका में कभी दर्ज नहीं किया जाता कि आपने किन परिस्थितियों में पढ़ाई की । खैर जीतता वही है जो मानसिक रूप से सुदृढ़ होता है। अतः सबसे पहले अपने मन में सकारात्मकता रखना ही सबसे ज़्यादा ज़रूरी मंत्र है । हमें कम समय मिला तो पाठ्यक्रम भी कम ही मिल रहा है ।  परीक्षा में अच्छे या पूरे के पूरे मार्क्स लाने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए । आगे चलिए - आगे चलिए का अर्थ अपने अध्यापक की बात काटना नहीं बल्कि (update रहिए) पाठ्यक्र...

स्वयं करें आधार कार्ड में अपनी डिटेल अपडेट

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भारत में नामों को लिखने के अलग प्रचलन के कारण कई लोगों को काफ़ी परेशानी होती है जैसे सुरेंद्र को अंग्रेज़ी में (Surendar, Surender, Surendra, Surendr, soorender,soorendra)  आदि ।काफ़ी समय से आधार कार्ड में अपना विवरण बदलने का कार्य UIDAI ( आधार कार्ड बनाने वाली संस्था ) ने बंद कर रखा था जिसके कारण लाखों लोगों को बेबसी  में इधर उधर भटकना पड़ रहा था । कुछ सेंटर पर तो पैसे देकर भी दो चार घंटे लाइन में लगना पड़ता था । biometric होने कि वजह से व्यक्ति को स्वयं जाना पड़ रहा था । उसकी जगह कोई और नहीं जा सकता था । विद्यार्थियों को सही विवरण के लिए धक्के खाने पड़ रहे थे । बैंक खाते आधार कार्ड को लिंक नहीं कर पा रहे थे । PAN कार्ड भी लिंक न हो पा रहा था । PAN कार्ड को लिंक करने के लिए कई बार deadline बढ़ाई जा चुकी है।लेकिन अब नहीं।अब घर बैठे ही आप ये सब अपने घर से ही कर सकते हैं । अपने फोन computer laptop से बस document upload कीजिए और आपका कार्ड सही हो जाएगा । इसके लिए आपको नीचे दी गई प्रक्रिया को पूरा करना है। UIDAI की वेबसाइट पर नाम, पता, जन्मतिथि और लिंग ऑनलाइन अपडेट कराने के लिए आप...